Kaal Bhairav Jayanti 2022 : जानें मुहूर्त, योग, पूजा विधि और महत्व आज है काल भैरव जयंती पर.

Kaal Bhairav Jayanti 2022: आज काल भैरव जयंती है. मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को काल भैरव जयंती मनाते हैं. हर माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मासिक कालाष्टमी मनाई जाती है. रुद्रावतार काल भैरव सभी दुखों को दूर करने वाले और अपने भक्तों को सुरक्षा और अभय प्रदान करने वाले हैं. ये तत्र-मंत्र के देवता हैं. इनकी पूजा निशिता काल में की जाती है. इनकी सवारी कुत्ता है और इनका स्वरूप विकराल एवं भयानक है. यह शत्रुओं में भय पैदा करने वाले महाकाल हैं. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ कृष्ण कुमार भार्गव से जानते हैं काल भैरव जयंती की तिथि, निशिता पूजा मुहूर्त और काल भैरव की पूजा विधि के बारे में.

काल भैरव जयंती 2022 मुहूर्त

मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी तिथि का प्रारंभ: आज, सुबह 05 बजकर 49 मिनट से

मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी तिथि का समापन: कल, 17 नवंबर, सुबह 07 बजकर 57 मिनट पर

निशिता पूजा मुहूर्त: आज रात 11 बजकर 40 मिनट से देर रात 12 बजकर 33 मिनट तक

सुब​ह पूजा समय: सुबह 06 बजकर 44 मिनट से सुबह 09 बजकर 25 मिनट तक

शाम का पूजा समय: शाम 04 बजकर 07 मिनट से शाम 05 बजकर 27 मिनट,

शाम 07 बजकर 07 मिनट से रात 10 बजकर 26 मिनट तक

ब्रह्म योग: आज 12 बजकर 32 एएम से देर रात 01 बजकर 09 मिनट तक

इंद्र योग: आज देर रात 01:09 बजे से

काल भैरव जयंती 2022 पूजा विधि

1. शुभ मुहूर्त में माता पार्वती और काल भैरव की पूजा करनी चाहिए. इस दिन बेलपत्र पर ओम नम: शिवाय लिखकर भगवान शिव को अर्पित करें.

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2. काल भैरव को नारियल, सिंदूर, चना, सरसों का तेल, जलेबी, पुआ, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करें.

3. इस दौरान ओम कालभैरवाय नम: मंत्र का उच्चारण करें. फिर काल भैरव चालीसा का पाठ करें. उसके बाद काल भैरव की आरती करें.

4. पूजा के अंत में किसी भी काले कुत्ते को रोटी और गुड़ खिलाएं.

5. ​निशिता काल में काल भैरव की पूजा करने और उनके मंत्रों का जाप करने से सिद्धियां प्राप्त होती हैं. ग्रह दोष और रोग दूर होते हं. शत्रु और मृत्यु भय दूर होता है.

काल भैरव की उत्पत्ति
त्रिदेवों में भगवान शिव को बड़ा बताए जाने से ब्रह्म देव नाराज हो गए थे. तब ब्रह्म देव भगवान शिव का अपमान करने लगे. उस दौरान शिव जी के क्रोध स्वरूप रुद्रावतार काल भैरव की उत्पत्ति हुई. उन्होंने ब्रह्म देव का क्रोध से जल रहे एक सिर को काट दिया था. काल भैरव काशी के कोतवाल हैं. हर शक्तिपीठ पर काल भैरव का भी मंदिर है. वे देवी के रक्षक माने जाते हैं.