Bhadrapada Amavasya 2022 : जानें मुहूर्त, स्नान-दान समय, पितृ दोष उपाय आज है भाद्रपद अमावस्या.

आज 27 अगस्त दिन शनिवार को भाद्रपद अमावस्या (Bhadrapada Amavasya) है. इस दिन सुबह पवित्र नदियों में स्नान करने, पितरों की पूजा करने और दान करने का विधान है. ऐसा करने से पुण्य प्राप्त होता है और पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है. जिन लोगों को पितृ दोष होता है, उनके लिए अमावस्या तिथि पर उपाय करना अच्छा रहता है.

भाद्रपद अमावस्या 2022 मुहूर्त

भाद्रपद अमावस्या तिथि की शुरूआत: 26 अगस्त, शुक्रवार, दोपहर 12:23 बजे से

भाद्रपद अमावस्या तिथि की समाप्ति: 27 अगस्त, शनिवार, दोपहर 01:46 बजे पर

शिव योग का प्रारंभ: आज प्रात:काल से लेकर कल 28 अगस्त को 02:07 एएम तक

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक

भाद्रपद अमावस्या स्नान-दान का समय
आज प्रात:काल से ही शिव योग प्रारंभ हो रहा है, जो आज पूरे दिन है. ऐसे में आप प्रात:काल से ही पवित्र नदियों में स्नान कर सकते हैं. नदी स्नान नहीं कर सकते हैं तो घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें.

अमावस्या दान
आज स्नान करने के बाद आप किसी गरीब ब्राह्मण को अपने सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, अन्न, फल, सब्जी दान दे सकते हैं और दक्षिणा देकर विदा करें. आज शनि अमावस्या भी है, इसलिए आप चाहें तो काला छाता, काले वस्त्र, शनि चालीसा, लोहा या स्टील आदि का भी दान कर सकते हैं. इससे शनि देव प्रसन्न होंगे और आपके दुख दूर होंगे.

अमावस्या पर श्राद्ध कर्म का समय
आमवस्या के दिन आप पितरों की पूजा सुबह कर सकते हैं, लेकिन पितरों के लिए श्राद्ध कर्म आदि करना है तो यह सब कार्य सुबह 11:30 बजे से लेकर दोपहर 02:30 बजे तक संपन्न कर लेना चाहिए.

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पितृ दोष उपाय
1. पितृ दोष से मुक्ति के लिए अमावस्या के दिन आप स्नान के बाद पितरों को जल से तर्पण दें. इसके लिए अक्षत्, फूल, काला तिल और जल लें और उससे पितरों को तर्पण दें. इससे पितर तृप्त होंगे और वे खुश होकर आशीष देंगे. यदि कुश की अंगुठी रिंग फिंगर में पहनकर ये कार्य करें तो पितर अत्यधिक प्रसन्न होंगे.

2. पितृ दोष से मुक्ति के लिए पितरों के लिए पिंंडदान करें. उनका श्राद्ध कर्म करें. इससे उनकी आत्मा संतुष्ट हो जाएगी और आपको सुखी जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होगा.

3. पितृ दोष से मुक्ति के लिए आप ब्राह्मणों को भोजन करा सकते हैं. उस भोजन का एक हिस्सा गाय, कौआ आदि को खिला दें. मान्यता है कि वह भोजन पितरों को प्राप्त होता है, जिससे वे संतुष्ट होते हैं.