INDIAN ARMY JAWAN: भारतीय सेना को मिलने जा रही दुनिया की सबसे खतरनाक राइफल, 800 मीटर तक दुश्मनों में मचा देगी कहर

भारत 10 साल के अंदर रूस की मदद से 6 लाख एके 203 असॉल्ट राइफल का उत्पादन करेगा.दोनों देशों के बीच सैन्य-तकनीकी सहयोग के परिणामस्वरूप इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड का निर्माण हुआ है.

भारत के सैनिकों को जल्दी ही एके-203 असॉल्ट राइफल की पहली खेप मिलने वाली है. जानकारी के अनुसार यूपी में अमेठी एक फैक्ट्री में इसका उत्पादन भी होने लगा है. पिछले कई सालों से पेंडिंग पड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत हो गई है. जानकारी के अनुसार भारत 10 साल के अंदर रूस की मदद से 6 लाख एके 203 असॉल्ट राइफल का उत्पादन करेगा.दोनों देशों के बीच सैन्य-तकनीकी सहयोग के परिणामस्वरूप इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड का निर्माण हुआ है.

साल 2019 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेठी से जब यह ऐलान किया था कि अब से जिले की पहचान AK-203 से राइफल होगी, तब विरोधियों ने इसे महज़ जुमला बताया था.लेकिन आज ये बात अक्षरशः सत्य हो रही है.जनरल मनोज पांडे के अनुसार मार्च तक भारतीय सेना को 10 साल की अवधि में निर्मित होने वाली कुल 6,01,427 राइफलों में से 5,000 एके -203 राइफलों की पहली खेप मार्च तक सेना को सौंप दी जाएगी.

कैसी है AK-203 असॉल्ट राइफल?
एके 203 राइफल एके सीरीज की सबसे घातक और आधुनिक राइफल है. इसमें वे सभी खूबियां हैं, जो पारंपरिक AK सीरीज में थी. रूस ने इसे 2018 में तैयार किया था. एके 203 असॉल्ट राइफल्स हल्की है और हर मौसम के लिए कारगर है. इस हथियार से 60 सेकेंड में 700 राउंड फायरिंग की जा सकती है. इसकी रेंज 500 से 800 मीटर है. एक मैगजीन में 30 राउंड फायरिंग करने की क्षमता है. एके 203 असॉल्ट राइफल का वजन 3.8 किलोग्राम है. जबकि इसकी लंबाई 705 मिलीमीटर है.

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2018 में पहली बार हुई थी घोषणा
AK-203 परियोजना, इंडो-रूस राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड नामक एक संयुक्त उद्यम के माध्यम से, पहली बार 2018 में घोषित की गई थी, लेकिन लागत, रॉयल्टी, टेक्नोलॉजी को लेकर बात नहीं बन पा रही थी. अब इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के प्लांट में राइफल्स का निर्माण शुरू हो गया है.

अगले दस साल में राइफल का होगा निर्माण
बता दें कि भारत और रूस के बीच दिसंबर, 2021 में 5,124 करोड़ रुपये की डील पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसमें 6,01,427 एके-203 असॉल्ट राइफल पूरी तरह तकनीकी हस्तांतरण के साथ भारत में तैयार की जानी हैं. इन राइफलों का निर्माण अगले 10 साल में किया जाएगा, जिससे 12 लाख जवानों वाली भारतीय सेना को बेहद मजबूती मिलने की उम्मीद है.