Vinayak Chaturthi 2022 : आज करे गणेश पूजा पूरे विधि विधान से हर मुश्किल होगी आसान.

Vinayak Chaturthi 2022 Puja Vidhi: आज पौष माह (Paush Month) की विनायक चतुर्थी है. यह नए साल 2022 (New Year 2022) की पहली विनायक चतुर्थी है. आज के दिन व्रत रखा जाता है और गणेश जी (Lord Ganesha) की दोपहर में पूजा की जाती है. आज विनायक चतुर्थी की पूजा का मुहूर्त दिन में 11 बजकर 25 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक है. आज के दिन गणेश जी की पूजा करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और हर कार्य आसानी से बिना किसी बाधा के पूरे हो जाते हैं. गणेश जी की कृपा से जीवन में शुभता बढ़ती है और सौभाग्य में वृद्धि होती है. आइए जानते हैं कि विनायक चतुर्थी की व्रत एवं पूजा विधि क्या है?

विनायक चतुर्थी व्रत एवं पूजा विधि :-

पंचांग के अनुसार पौष मा​ह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 05 जनवरी को दोपहर 02 बजकर 34 मिनट पर हुआ और उसका समापन उसी रात 12 बजकर 29 मिनट पर हो गया. लेकिन उदयातिथि अनुसार चतुर्थी व्रत आज रखा जा रहा है.

1. आज प्रात: स्नान आदि के बाद स्वच्छ कपड़े पहन लें. उसके बाद हाथ में जल, पुष्प और अक्षत् लेकर विनायक चतुर्थी व्रत एवं गणेश जी की पूजा का संकल्प करें.

2. संकल्प करने के बाद पूजा स्थान पर गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर दें. फिर दैनिक पूजा कर लें. उसके बाद विनायक चतुर्थी की पूजा मुहूर्त के अनुसार करें आसन पर बैठें.

3. सर्वप्रथम गणेश जी को लाल फूल, अक्षत्, चंदन, धूप, दीप, गंध, जनेऊ आदि अर्पित करें. उसके बाद उनको वस्त्र, 21 गांठ दूर्वा, मौसमी फल आदि चढ़ाएं. अब मोदक या लड्डू का भोग लगाएं. फिर गणेश चालीसा का पाठ करें.

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4. पूजा के अंत में विनायक चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें. व्रत कथा का श्रवण करने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है. व्रत कथा पढ़ने के बाद सबसे अंत में गणेश जी की आरती करें.

5. य​दि आप किसी विशेष कार्य की सिद्धि चाहते हैं, तो उससे जुड़े गणेश मंत्र का जाप करें. उसके बाद आरती करें. दोपहर में विनायक चतुर्थी की पूजा समापन के बाद प्रसाद वितरण कर दें.

6. रात्रि के समय में आप पारण करते हैं, तो दिनभर भगवत जागरण के बाद किसी गरीब को उसकी जरूरत की वस्तुएं दान करें. उसके बाद पारण करके व्रत को पूरा करें.

7. यदि आप अगले दिन व्रत का पारण करते हैं, तो अगले दिन स्नान के बाद दान करें. फिर पारण करें. गणेश जी से व्रत एवं पूजा में भूलवश हुई गलतियों के लिए क्षमा प्रार्थना कर लेना चाहिए. यह चतुर्थी व्रत एवं पूजा की सामान्य विधि है.

8. ध्यान रखने वाली बात ये है कि आप चतुर्थी व्रत के दिन चंद्रमा का दर्शन न करें.