VASTU SHASTRA : भूलकर भी ना सोएं इस दिशा में शादीशुदा महिलाएं वरना हो सकता है भारी नुकसान.

वास्तु शास्त्र में घर की सभी दिशाओं का अहम स्थान और खास महत्व है. पश्चिम और उत्तर के बीच की दिशा को वायव्य कोण कहते हैं. वास्तु के मुताबिक उत्तर-पश्चिम की दिशा लंबी उम्र, अच्छी सेहत और शक्ति प्रदान करती है. घर के उत्तर-पश्चिम दिशा में अगर दोष हो तो दोस्त भी दुश्मन बन जाते हैं. साथ ही ऊर्जा उर्जा में कमी और आयु कम हो जाती है. ऐसे में जानते हैं उत्तर-पश्चिम दिशा से जुड़ी खास बातें.

वायव्य कोण से जुड़े वास्तु नियम
-वास्तु शास्त्र के मुताबिक उत्तर-पश्चिम दिशा यानी वायव्य कोण में शादीशुदा महिलाओं को नहीं सोना चाहिए. इस दिशा में सोने से वैवाहिक जीवन में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. वहीं उत्तर-पश्चिम दिशा में अविवाहित कन्याओं को सोना चाहिए, क्योंकि इस दिशा में सोने से विवाह के योग मजबूत होते हैं.

-वास्तु शास्त्र के अनुसार, शौचालय के लिए दक्षिण दिशा के बीच का स्थान या वायव्य कोण उपयुक्त है. साथ ही शौचालय में सीट इस प्रकार हो कि उस पर बैठने के क्रम में मुंह उत्तर या दक्षिण में होना चाहिए.

वास्तु के मुताबिक बच्चों की पढ़ाई के लिए उसका स्टडी टेबल और कुर्सी ईशान (पूर्व-उत्तर), उत्तर या वायव्य कोण में रखना शुभ होता है. वहीं किताब की आलमारी पश्चिम या दक्षिण दिशा में रखना शुभ होता है. हालांकि टेबल लैंप हमेशा टेबल के दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना चाहिए.

-वास्तु शास्त्र के मुताबिक उत्तर-पश्चिम दिशा के दोष को दूर करने के लिए एक्वेरियम या एक छोटा सा फव्वारा लगाना चाहिए. जिसमें 8 सुनहरी मछलियां और एक काली मछली रखना शुभ माना गया है.