the demons are not worshiped but the gods?आखिर भारत के ऐसे कौन से मंदिर में देवताओं की नहीं, बल्कि दानवों की पूजा होती हैं.

हिंदू धर्म में तैंतीस कोटि देवताओं का जिक्र किया गया है. इन देवताओं को बेहद शक्तिशाली माना गया है. माना जाता है कि जब भी धरती पर धर्म और अधर्म के बीच असंतुलन की स्थिति पैदा होती है, तब ये देवी देवता पृथ्वी पर आकर राक्षसों का संहार करते हैं और लोगों को उनके संकट से बचाते हैं. इस कारण हिंदू धर्म के लोगों की अपने देवताओं के प्रति गहरी आस्था है.

मान्यता है कि धरती का संचालन इन देवी देवताओं द्वारा ही होता है. देश के तमाम हिस्सों में अलग अलग देवी और देवताओं के मंदिर बने हुए हैं, जहां सुबह शाम लोग इन देवताओं का पूजन किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ मंदिर ऐसे भी हैं, जहां देवताओं की नहीं बल्कि दानवों की पूजा की जाती है? यहां जानिए ऐसे ही कुछ मंदिरों के बारे में.

पूतना का मंदिर
पूतना एक राक्षसी थी. जब भगवान विष्णु ने ​कृष्ण रूप में जन्म लिया था, तब कंस ने नन्हें कृष्ण को मारने के लिए पूतना को भेजा था. पूतना ने मां के रूप में श्रीकृष्ण को दूध पिलाने के बहाने जहर पिलाने का प्रयास किया था, लेकिन ​श्रीकृष्ण ने दूध पीने के बहाने उसका वध कर दिया था. गोकुल में आज भी पूतना का एक मंदिर बना हुआ है. इस मंद‍िर में पूतना की लेटी हुई मूर्ति है. ज‍िस पर कृष्‍ण छाती पर बैठकर दूध पीते द‍िखाई देते हैं.

हिडिंबा मंदिर
हिडिंबा महाशक्तिशाली भीम की पत्नी थीं और वो एक राक्षसी थीं. हालांकि उन्होंने राक्षसी होते हुए भी धर्म का साथ दिया था. हिमाचल के मनाली में हिडिंबा का एक मंदिर बना हुआ है और नियमित रूप से उनकी पूजा की जाती है.

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शकुनि का मंदिर
छल, कपट, प्रपंच में माहिर माने जाने वाले शकुनि को कौन नहीं जानता. मामा शकुनि के कारण ही महाभारत का युद्ध हुआ था. शकुनि को एक खलनायक के तौर पर देखा जाता है. लेकिन केरल के कोल्लम जिले में इस खलनायक का मंदिर बना हुआ है. इस मंदिर में लोग तांत्रिक क्रियाएं संपन्न कराने के लिए आते हैं और दर्शन करते समय शकुनि को नारियल और रेशम के कपड़े चढ़ाते हैं.

दुर्योधन मंदिर
केरल के कोल्लम जिले में ही दुर्योधन का भी मंदिर बना हुआ है. ये मंदिर श​कुनि के मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है. कुरु वंश में जन्म लेने वाले दुर्योधन में राक्षसी प्रवृत्ति थी, लेकिन फिर भी उसका पूजन किया जाता है. यहां उन्हें स्थानीय शराब ताड़ी, लाल कपड़े, नारियल, पान आदि चढ़ाए जाते हैं. इसके अलावा उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में भी दुर्योधन का एक मं​दिर है. दुर्योधन का मंदिर नेतवार नामक जगह से करीब 12 किमी दूर ‘हर की दून’ रोड पर स्थ‍ित सौर गांव में है. यहां से कुछ दूरी पर कर्ण का भी मंदिर बना हुआ है.

रावण मंदिर
त्रेतायुग के रावण का एक मंदिर मध्य प्रदेश के विदिशा में है. विदिशा जिले की नटेरन तहसील में रावण नाम का गांव भी है, वहां रावण की लेटी हुई प्रतिमा की पूजा की जाती है. यहां के लोगों का मान्यता है कि इस स्थान पर अगर रावण बाबा की पूजा नहीं की गई तो कोई भी काम सफल नहीं हो सकता. इसके अलावा रावण का एक मंदिर कानपुर में है. इस मंदिर को साल में केवल दो दिन के लिए दशहरा के दिन ही खोला जाता है. इन दिनों में रावण की मूर्ति को दूध से नहलाया जाता है और फिर उनका श्रृंगार किया जाता है, इसके बाद पूजन होता है. इसके अलावा कुछ अन्य जगहों पर भी रावण का मंदिर बना हुआ है.