Shiv Aarti : प्राप्त होगा मनोवांछित फल आज सोमवार को विधिपूर्वक करें शिव आरती.

आज सोमवार का दिन देवों के देव महादेव की पूजा के लिए समर्पित है. आज आप भगवान शिव को प्रसन्न करना चाहते हैं तो पूजा के समय विधिपूर्वक आरती करें. शिव जी की आरती घी के दीपक से करें.  भगवान शिव शक्ति के बिना अधूरे हैं, इसलिए जब भी आप शिव जी की आरती करें, तो माता पार्वती की भी आरती और पूजा करें. वैसे ही जब माता पार्वती की पूजा और आरती हो तो भगवान शिव की भी पूजा और आरती करनी चाहिए. आइए जानते हैं शिव जी की आरती (Shiv Aarti) और माता पार्वती की आरती (Mata Parvati Ki Aarti) के बारे में.

शिव आरती
ओम जय शिव ओंकारा, ओम जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा॥
ओम जय शिव…

एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
ओम जय शिव…

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥
ओम जय शिव…

अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥
ओम जय शिव…

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ओम जय शिव…

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥
ओम जय शिव…

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥
ओम जय शिव…

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥
ओम जय शिव…

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥
ओम जय शिव…

माता पार्वती की आरती
जय पार्वती माता जय पार्वती माता
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता। जय पार्वती माता

यह भी पढ़े :  Mauni Amavasya 2022 : जानें स्नान-दान का मुहूर्त एवं व्रत का महत्व मौनी अमावस्या पर.

अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता। जय पार्वती माता

सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा
देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा। जय पार्वती माता

सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता। जय पार्वती माता

शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा। जय पार्वती माता

सृष्ट‍ि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता। जय पार्वती माता

देवन अरज करत हम चित को लाता
गावत दे दे ताली मन में रंगराता। जय पार्वती माता

श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता। जय पार्वती माता

कर्पूरगौरं मंत्र
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।