Sawan Somwar : श्रद्धालु पाएंगे दोहरा लाभ सावन के दूसरे सोमवार पर बना है यह अनोखा संयोग.

सावन का दूसरा सोमवार 25 जुलाई को है। सावन के महीने में शिवजी की पूजा और अभिषेक करना बेहद शुभ माना जाता है। इस महीने में अभिषेक करना अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक फलदायी मानी गई है। यही वजह है कि इस महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन गंगा से जल लाकर शिवजी का अभिषेक करते हैं। सावन की शिवरात्रि यानी सावन कृष्ण चतुर्दशी के दिन शिवजी का अभिषेक और भी उत्तम माना गया है। लेकिन अबकी बार ऐसा संयोग बना है कि सावन शिवरात्रि से एक दिन पहले शिवजी की पूजा करेंगे तो यह शिवरात्रि के समान भी शुभ होगा और दोहरा लाभ दिलाएगा। आइए जानें सावन का दूसरा सोमवार क्यों है सभी शिव भक्तों के लिए बेहद खास।

सावन शिवरात्रि पर प्रदोष व्रत का संयोग
सावन का दूसरा सोमवार त्रयोदशी तिथि में मनाया जाएगा। कृष्ण पक्ष की त्र्योदशी तिथि का शिवपुराण में काफी महत्व बताया गया है। कहते हैं प्रदोष व्रत भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इसी तिथि में शिवजी सृष्टि का आरंभ और अंत करते हैं। सोमवार को जब प्रदोष व्रत लगता है तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहते हैं। सोम प्रदोष व्रत से मनुष्य को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी। ऐसे में सावन के दूसरे सोमवार के दिन व्रत और शिवजी की पूजा करने से एक साथ प्रदोष व्रत और सावन सोमवार व्रत का पुण्य मिलेगा। इससे समृद्धि के साथ ही लोक और परलोक में भी शिव भक्त सुख पा सकेंगे।

शुभ योग में सावन का दूसरा सोमवार
सावन के दूसरे सोमवार के दिन पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग उपस्थित रहेगा। इसके साथ ही अमृत सिद्धि योग भी प्रभावी रहेगा। इस शुभ योग में शिवजी का अभिषेक और पूजन करना बेहद शुभ फलदायी रहेगा। ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग में जो भी शुभ काम शुरू किया जाता है वह काम सफल और मंगलकारी होता है।

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सावन के दूसरे सोमवार पर रुद्राभिषेक
सावन का दूसरा सोमवार कई शुभ योग लेकर आया है इसमें ध्रुव योग भी शामिल है। घ्रुव योग सुबह से लेकर 3 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। इस शुभ योग में रुद्राभिषेक करवाना बहुत ही शुभ होगा। सावन के दूसरे सोमवार के दिन मृगशिरा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा जिसके स्वामी मंगल है। ऐसे में रुद्राभिषेक और शिव उपासना करने से मंगल दोष का प्रभाव कम होगा। जिनकी कुंडली में मांगलिक दोष है उन्हें शिव संग शिव परिवार का अभिषेक करना चाहिए। इससे मांगलिक दोष का प्रभाव कम होगा और पारिवारिक जीवन में प्रेम और सद्भाव का विकास होगा।