Philosophy : किसी अच्छे कारण से बोला गया झूठ, पुण्य कहलायेगा या पाप!

उपनिषद् से लेकर दर्शन शास्त्र तक में कर्मों को लेकर विस्‍तार से चर्चा की गई है. इनके मुताबिक आत्मा जब शरीर छोड़ती है तो उसके भविष्‍य का फैसला इस आधार पर होता है कि उसके कर्म कैसे रहे हैं. यदि व्‍यक्ति के कर्माशय में 50% से अधिक पुण्य कर्म हों तो उसे फिर से मनुष्य शरीर मिलता है. वहीं 100% निष्काम पुण्य होने पर मोक्ष प्राप्त होता है. इसलिए लोग ज्‍यादा से ज्‍यादा पुण्‍य करते हैं ताकि मृत्‍यु के बाद भी उन्‍हें कष्‍ट न भुगतने पड़ें. शास्‍त्रों में झूठ बोलने को बड़ा पाप माना गया है.

छोटा सा झूठ भी दिलाता है बड़ी सजा :
ज्योतिषाचार्य वेदाश्वपति आलोक कहते हैं कि व्‍यक्ति को हर हालत में झूठ बोलने से बचना चाहिए क्‍योंकि हर झूठ हमारे पाप कर्मों को बढ़ाता जाता है. यहां तक कि अच्‍छे काम या कारण के लिए बोला गया झूठ भी पाप की श्रेणी में ही आता है. उदाहरण के लिए यदि कोई गाय कसाई से बचकर भागती हुई हमारे पास आए और हम उसे छिपा लें. बाद में कसाई के पूछने पर हम झूठ बोल दें तो हमें झूठ बोलने का पाप तो भुगतना ही पड़ेगा. हालांकि गाय की रक्षा करने के लिए मिला पुण्‍य इस पर कहीं ज्‍यादा भारी होगा. ऐसे कर्म मिश्रित कर्म कहलाते हैं यानि कि ये हमें पुण्‍य और पाप दोनों का भागी बनाते हैं.

गरुड़ पुराण में भी है उल्‍लेख :
गरुड़ पुराण में भी झूठ बोलने को पाप की श्रेणी में रखा गया है और ऐसे लोगों को नर्क में मिलने वाली यातनाओं के बारे में भी बताया गया है. जबकि आज के समय में लोग बात-बात पर झूठ बोलते हैं और ऐसी स्थिति उनकी मौजूदा जिंदगी और मरने के बाद की स्थिति के लिए भी ठीक नहीं है. चोरी करना, झूठ बोलना व्‍यक्ति को जिंदगी में भी सजा और मुश्किलें दिलाता है.