Paush Purnima 2022 : पौष पूर्णिमा व्रत, इसका महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि.

हर महीने में 15-15 दिनों के दो पक्ष होते हैं. इन्हें शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष कहा जाता है. शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन को पूर्णिमा (Purnima) कहा जाता है. माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा (Moon) अपनी सभी कलाओं से सुशोभित होकर चमकता है. शुक्ल पक्ष को शास्त्रों में देवताओं का समय कहा गया है. वहीं पूर्णिमा के दिन को विशेष माना गया है. इस दिन चंद्रमा के साथ साथ श्री विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा की जाती है. इसके अलावा स्नान, दान पुण्य का विशेष महत्व है. माना जाता है कि पूर्णिमा के दिन दान करने से व्यक्ति के पाप कटते हैं और अमोघ फल की प्राप्ति होती है. शास्त्रों में पूर्णिमा के व्रत को भी बहुत शुभ माना गया है. पौष मास की पूर्णिमा तिथि 17 जनवरी को सोमवार के दिन पड़ रही है. यहां जानिए पूर्णिमा व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और अन्य जानकारी.

पूर्णिमा के व्रत का शुभ मुहूर्त

पौष पूर्णिमा तिथि 17 जनवरी को देर रात 3 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी और 18 जनवरी को सुबह 5 बजकर 17 मिनट तक चलेगी.

पूर्णिमा का व्रत 17 जनवरी को ही रखा जाएगा. सुबह 08:34 बजे से 09:55 बजे तक राहुकाल रहेगा. राहुकाल को शुभ नहीं माना जाता. इस दौरान दान, पुण्य, पूजा आदि कार्य न करें.

पौष पूर्णिमा व्रत व पूजा विधि :

पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की साफ़-सफाई करें. इसके बाद पानी में थोड़ा गंगा जल डालकर स्नान करें. इसके बाद भगवान के समक्ष व्रत का संकल्प लें. इसके बाद विधिपूर्वक भगवान सत्यनारायण का पूजन करें और पुष्प, फल, मिठाई, पंचामृत और नैवेद्य अर्पित करें.

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इसके बाद भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें या पढ़ें. माना जाता है कि पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना और सत्यनारायण भगवान की कथा पढ़ने या श्रवण करने से व्यक्ति को सौ यज्ञों के समतुल्य पुण्य की प्राप्ति होती है. पूजन के बाद सूर्य के सन्मुख खड़े होकर जल में तिल डालकर उसका तर्पण करें. दिन भर व्रत रखकर भगवान का मनन करें. रात में चंद्र दर्शन करके चंद्रमा को अर्घ्य दें. इसके बाद अपना व्रत खोलें.

पूर्णिमा व्रत के लाभ : 

– पूर्णिमा का व्रत रखने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और अनेक पाप नष्ट होते हैं.

– अगर आपके जीवन में तमाम समस्याएं हैं, आप मानसिक रूप से बहुत परेशान रहते हैं, तो आपको ये व्रत जरूर रखना चाहिए. इस व्रत के प्रभाव से आपका चंद्र मजबूत होगा और आपकी ये समस्याएं दूर हो सकती हैं.

– पारिवारिक क्लेश, झगड़े आदि को दूर करने के लिए इस व्रत को रहना चाहिए.

– जिन लोगों के मन में अकारण किसी बात का भय रहता है, वो इस व्रत को रहकर इस समस्या से मुक्ति पा सकते हैं.

– पूर्णिमा का व्रत वैवाहिक जीवन को सुखद बनाता है और पति पत्नी के बीच प्रेम बढ़ाता है.