Mauni Amavasya 2022 : जानें मौनी अमावस्या पर व्रत के 6 प्रमुख नियम क्या हैं.

Mauni Amavasya 2022: पंचांग के अनुसार माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या या माघी अमावस्या (Magh Amavasya) कहा जाता है. इस वर्ष मौनी अमावस्या आज 01 फरवरी दिन मंगलवार को पड़ रही है. मौनी अमावस्या की प्रतीक्षा लोग सालभर से करते हैं क्योंकि इस दिन गंगा स्नान (Ganga Snan) करने मात्र से ही जीवन के सभी पाप मिट जाते हैं, कष्ट दूर हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन सभी देवी देवता गंगा नदी में वास करते हैं, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है. इस वजह से ही प्रयागराज में त्रिवेणी के संगम पर लोग स्नान कर महापुण्य प्राप्त करने से नहीं चूकते हैं. इस वर्ष भी कोरोना का प्रभाव है, इसलिए आप चाहें तो घर पर भी नियमपूर्व स्नान-दान और व्रत (Maun Vrat) करके पुण्य प्राप्त कर सकते हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में.

मौनी अमावस्या पर स्नान-दान एवं व्रत के नियम

1. मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान का महत्व है. इस दिन आप हर हर गंगे का जयघोष करते हुए स्नान करें और मां गंगे से अपने कष्टों तथा पाप को दूर करने एवं मोक्ष प्रदान करने की प्रार्थना करें.

2. आज आप गंगा स्नान नहीं कर पा रहे हैं, तो घर पर ही बाल्टी के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें. मां गंगा को ध्यान करके पाप एवं कष्ट से मुक्ति की प्रार्थना करें.

3. मौनी अमावस्या पर स्नान के बाद सूर्य देव को विधिपूर्वक जल अर्पित करें. उनसे सुख, समृद्धि एवं संतान के लिए प्रार्थना करें.

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4. अब आपको अपने पितरों के निमित्त मौनी अमावस्या पर पानी में काला तिल और चावल डालकर तर्पण करना चाहिए. साथ ही पितरों को स्मरण करके उनकी आत्म तृप्ति के लिए प्रार्थना करें. वे खुश होकर आपके परिवार के खुशहाल जीवन का आशीष देंगे.

5. मौनी अमावस्या पर पूजा और प्रार्थना के बाद दान करना जरूरी है. इस दिन कंबल, गरम कपड़े, अनाज, जूता आदि का दान करना चाहिए.

6. मौनी अमावस्या के दिन स्नान-दान के बाद मौन व्रत धारण करें. मौन व्रत धारण करने का उद्देश्य अपनी आंतरिक एवं आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाना है. साथ ही आत्मावलोकन करना है, ताकि आपको अपने जीवन का उद्देश्य प्राप्त हो. इस दिन सात्विक भोजन या फलाहार करें. वाणी पर संयम रखें.