Mangalwar Puja : जानें हनुमान जी की आरती की सही विधि प्रसन्न हो जाएंगे बजरंगबली.

Mangalwar Puja: आज मंगलवार का दिन संकटमोचन हनुमान जी (Lord Hanuman) की पूजा के लिए समर्पित है. इस दिन को ही हनुमान जी का जन्म ​हुआ था. हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए मंगलवार व्रत और पूजा की जाती है. मंगलवार व्रत कथा का पाठ भी किया जाता है. हालांकि जो लोग व्रत नहीं रखते हैं, वे हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करते हैं और हनुमान जी की आरती करते हैं. हनुमान जी की आरती के समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है. आरती करने से पूजा पूर्ण होती है. आइए जानते हैं हनुमान जी की आरती (Hanuman Ji Ki Aarti) की सही विधि एवं ध्यान रखने वाली बातों के बारे में.

हनुमान जी की आरती विधि

1. हनुमान जी की आरती सुबह पूजा के समय और शाम को प्रदोष काल में करना चाहिए. सुबह नहीं कर पा रहे हैं, तो शाम को अवश्य ही करें. पूजा के पश्चात आरती करें. पूजा में हनुमान जी को लड्डू का भोग लगाएं.

2. हनुमान जी की आरती घी के दीपक या फिर कपूर से करें. दीपक में आप एक या पांच बत्तियां लगा सकते हैं. घी का दीपक मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए उत्तम माना जाता है.

3. हनुमान जी की आरती शुरु करने से पूर्व दीपक जला लें, फिर शंख बजाएं. उसके बाद आरती कीजै हनुमान लला की… एक सुर में प्रारंभ करें. साथ में घंटी बजाते रहें.

4. ध्यान रखें कि आरती के दीपक को बाएं से दाएं ओर यानी घड़ी की सूइयों की दिशा में घुमाना चाहिए.

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5. हनुमान जी की आरती करने के बाद कर्पूरगौरं मंत्र पढ़ें. यह मंत्र हर आरती के बाद पढ़ा जाता है.

हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके॥

अंजनि पुत्र महा बलदाई। सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥

लंका सो कोट समुद्र-सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सवारे॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि संजीवन प्राण उबारे॥
पैठि पाताल तोरि जम-कारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥

बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे॥
सुर नर मुनि आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥

कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई॥
जो हनुमानजी की आरती गावे। बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥

कर्पूरगौरं मंत्र

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।

हनुमान जी की आरती में ध्यान रखने वाली बातें

1. पूजा के समय लाल रंग के फूलों का प्रयोग करें.

2. हनुमान जी को आरती से पूर्व लाल सिंदूर अर्पित करना चाहिए क्योंकि हनुमान जी को सिंदूर बहुत प्रिय है.

3. आरती करने से पूर्व पूजा करना आवश्यक होता है.

4. आरती के शब्दों का सही उच्चारण करें.

5. पूजा और आरती के समय मन में किसी प्रकार का द्वेष, क्रोध, काम, लोभ आदि न रखें.