SURYA GRAHAN 2021 : साल का अंतिम सूर्य ग्रहण कहां दिखाई देगा, क्या है इसमें खास, ग्रहण के बाद तुरंत करें ये 5 काम.

Solar Eclipse 2021 : वर्ष 2021 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 4 दिसंबर शनिवार (Surya Grahan 2021 Date) को लगेगा। यह सूर्य ग्रहण कब लगेगा और कहां दिखाई देगा? किन राशियों पर रहेगा शुभ और किन पर अशुभ आओ जानते हैं हर जरूरी बात।

कहां दिखाई देगा सूर्य ग्रहण ( where will the solar eclipse be visible ) : साल का आखिरी सूर्य ग्रहण दक्षिण अफ्रीका, अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अमेरिका और अटलांटिक के दक्षिणी भाग के लोगों को दिखाई देगा।

क्या है इसमें खास : ( Solar Eclipse 2021 : What is special about it )

किस समय दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2021 Timing) : सूर्य ग्रहण 4 दिसंबर की सुबह 10 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगा, जो दोपहर 03 बजकर 07 मिनट पर समाप्त होगा।

सूतक काल (sutak kaal) : यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा इसलिए इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। सूर्य ग्रहण के प्रारंभ होने से 12 घंटे पूर्व ही सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। हालांकि जहां पर सूर्य ग्रहण दिखाई देगा वहां पर सूतक काल मान्य होगा और इससे जुड़ी सावधानियां भी रखना जरूरी होगी।

शनि अमावस्या को है सूर्य ग्रहण ( Shani Amavasya ) : यह सूर्य ग्रहण शनि अमावस्या के दिन देखा जाएगा। शनिवार को जब भी अमावस्या आती है तो उसे शनि अमावस्या कहते हैं जिसका ज्योतिष में खासा महत्व रहता है।

चार घंटे तक दिखाई देगा सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse 2021 Timing) : सूर्य ग्रहण 4 दिसंबर की सुबह 10 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगा, जो दोपहर 03 बजकर 07 मिनट पर समाप्त होगा। यह सूर्य ग्रहण
लगभग चार घंटे तक चलेगा। इसे चार घंटे तक देखा जा सकेगा।

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यह है खग्रास सूर्य ग्रहण ( khagras surya grahan ) : चंद्रमा जब सूर्य को पूर्ण रूप से ढंग लेता है तो ऐसे में चमकते सूरज की जगह एक काली तश्तरी-सी दिखाई है। इसमें सबसे खूबसूरत दिखती है ‘डायमंड रिंग।’ चंद्रमा के द्वारा सूर्य को पूरी तरह से ढंकने से जरा पहले और चंद्रमा के पीछे से निकलने के फौरन बाद काली तश्तरी के पीछे जरा-सा चमकता सूरज हीरे की अंगूठी जैसा दिखाई देता है। संपूर्ण हिस्से को ढंकने की स्थिति खग्रास ग्रहण कहलाती है।

सूर्य ग्रहण मुख्यत: तीन प्रकार के होते हैं। 1.खग्रास सूर्य ग्रहण (पूर्ण सूर्य ग्रहण) 2.आंशिक सूर्य ग्रहण (खंडग्रास या खण्ड-ग्रहण), 3.वलयाकार सूर्य ग्रहण ( कंकणाकृति )। सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूर्य आंशिक अथवा पूर्ण रूप से चंद्रमा द्वारा आवृत्त हो जाए। अंश में आवृत्त करने को आंशिक और पूर्ण को खग्रास कहते हैं। फिर जब चंद्रमा सूर्य को इस तरह ढंकता है कि चंद्राम के बाहर का क्षेत्र सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होने के कारण कंगन या वलय के रूप में सूर्य चमकता हुआ दिखाई देता है। कंगन आकार में बने सूर्य ग्रहण को ही वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते हैं।

एक्लिप्स ग्लास से देखें सूर्य ग्रहण ( Eclipse glasses ): सूर्य ग्रहण देखने के लिए अपनी आंखों की सुरक्षा के लिए एक्लिप्स ग्लास का इस्तेमाल करना चाहिए। घर के बने फिल्टर या पारंपरिक धूप के चश्मे का इस्तेमाल न करें इससे आंखें खराब हो सकती है। जो बच्चे ग्रहण देखना चाहते हैं वे माता-पिता की देखरेख में ऐसा कर सकते हैं, क्योंकि यह तय करना जरूरी है कि बच्चे किस तरह के ग्लास से यह देख रहे हैं।

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तुरंत करें ये 5 काम :

1. घर का करें शुद्धिकरण अर्थात घर की साफ सफाई करने के बाद पवित्र जल का छिड़काव करके उसे शुद्ध करें।
नमक मिले पानी से पोछा लगा सकते हैं।

2. अच्‍छे से स्नान आदि करके शरीर को शुद्ध कर लें। गंगाजल मिले पानी से स्नान करना चाहिए।

3. जल को शुद्ध करने के लिए उसमें तुलसी का पत्ता डाल दें। भोजन को फिर से पकाएं और उसमें भी तुलसी का पत्ता डाल दें। ग्रहण के बाद ताजा भोजन बनाकर खाना चाहिए.

4. मंदिर में सीदा रखकर आएं या पुजारी को दे दें। सीदा दान अर्थात अनाज, गुड़, घी, नमक, शक्कर आदि वस्तुओं का दान करना। इसके साथ ही मेहतर या सफाईकर्मी को सिक्का या कुछ रुपये दान करें।

5. पूजा स्थान की सफाई करनी चाहिए. इसके बाद भगवान का दर्शन एवं पूजा पाठ करें।