Shubh Vivah Muhurat 2022 : 24 नवंबर के बाद मिलेंगे शादी के मुहूर्त आज से चातुर्मास शुरू.

देवशयनी एकादशी के साथ रविवार से चातुर्मास शुरू हो चुके हैं। इसके साथ ही मांगलिक कार्य थम जाएंगे लेकिन धार्मिक कार्यों पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। इसके बाद चार नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ चातुर्मास पूरे होंगे, लेकिन मांगलिक कार्यों की शुरुआत 24 नवंबर के बाद होगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, शुक्र ग्रह अस्त होने के कारण 4 से 24 नवंबर तक शादियां नहीं हो सकेंगी। आषाण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का आरंभ होता है, जो कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी देवउठनी एकादशी तक चलता है।

ग्रह-नक्षत्र का किया जाता है अध्ययन
ज्योतिषों के अनुसार, शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए ग्रह-नक्षत्रों और सितारों की स्थितियों का अध्ययन किया जाता है। शुक्र और गुरु तारा की स्थिति को देखकर ही सभी विवाह मुहूर्त निश्चित किए जाते हैं। अगर शुक्र और गुरु दोनों ही तारे अस्त हैं तो उस स्थिति में शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त नहीं निकलता है। दोनों के उदय होने पर ही विवाह और शुभ कार्य जैसे मांगलिक कार्य संपन्न किए जाते हैं।

चातुर्मास में न करें ये काम
चातुर्मास के चार महीनों में विवाह व शुभ कार्यों पर रोक लगा दी जाती है और इन चार महीनों में यात्रा न करने की सलाह भी दी जाती है। इन चार महीनों के दौरान घर से तभी निकलें जब जरूरी हो क्योंकि इन चार महीनों में वर्षा ऋतु के कारण ऐसे जीव-जंतु सक्रिय हो जाते हैं, जो काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं। चातुर्मास में श्रीहरि योग निद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं। इन मास में पितरों को प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध, नवरात्रि, दिवाली-धनतेरस जैसे कई बड़े त्योहार आते हैं।

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सावन का पहला सोमवार 18 को
सावन माह 14 जुलाई से शुरू होकर 12 अगस्त को सावन पूर्णिमा पर रक्षाबंधन के साथ समाप्त होगा। सावन पहला सोमवार 18 जुलाई, दूसरा 25 जुलाई, तीसरा 1 अगस्त, चौथा व अंतिम सोमवार, 8 अगस्त को होगा। इस दौरान 24 जुलाई को कामदा एकादशी, 25 को सोमवारीय प्रदोष पूजन और 26 को मास शिवरात्रि पूजन रोगा। सावन मास भगवान शिव का प्रिय मास है, इस महीने भगवान शिव की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती है। मान्यता है कि सावन के सभी सोमवार का व्रत रखने से सभी पापों का अंत होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

हरियाली तीज 31 को
तीन तीजों में पहली हरियाली तीज 31 जुलाई को होगी। इसके बाद दो अगस्त को नाग पंचमी का पूजन होगा तो 8 अगस्त को पुत्रदा एकादशी होगी। 14 अगस्त को कजरी तीज और 30 अगस्त को हरतालिका तीज होगी। तीज का पर्व भारत वर्ष में बहुत धुमधाम से मनाया जाता है, यह उत्सव महिलाओं का होता है इसलिए महिलाएं श्रृंगार कर शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना करती हैं। नव विवाहित युवतियां प्रथम सावन में मायके आकर इस हरियाली तीज में सम्मिलित होने की परम्परा है। कुंवारी कन्याएं भी यह व्रत करती हैं ताकि उनको भी शिव की तरह ही पति मिले। इस उत्सव में कुंवारी कन्याओं से लेकर विवाहित युवा और वृद्ध महिलाएं शामिल होती हैं