ASTROLOGY : इन 3 राशि के लोग क्यों मुकाम हासिल करने से हमेशा चूक जाते हैं जानिए कहां होती है भूल.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों का प्रभाव हर व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है. जब पाप ग्रह या क्रूर ग्रह अशुभ प्रभाव देने लगता है तो तमाम तरह की परेशानियां चारों ओर से घेर लेती है. ऐसे में व्यक्ति का भविष्य अंधकारमय हो जाता है. ज्योतिष के मुताबिक कुछ राशियों के जातक बुरी आदतों के कारण खुद ही अपना जीवन बर्बाद कर लेते हैं. आइए जानते हैं उन राशियों के बारे में.

सिंह (Leo)
सिंह राशि के स्वामी सूर्य देव हैं. सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है. सूर्य प्रधान जातकों में राजा जैसी आदतें मौजूद होती हैं. सिंह राशि के जातकों की कुंडली में जब सूर्य निर्बल हो जाता है तो व्यक्ति में अहंकार बढ़ जाता है. ऐसे में अगर पाप ग्रह राहु-केतु की दृष्टि पड़ती है तो स्थिति और भी विकराल हो जाती है. ऐसे में इंसान गुस्से में आकर कुछ ऐसा कदम उठा लेता है जिससे परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐस में रविवार के दिन सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए.

वृश्चिक (Scorpio)
इस राशि के जातकों को जब गुस्सा आता है तो उन्हें शांत करना बहुत मुश्किल हो जाता है. वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल देव हैं. मंगल को ग्रहों के सेनापति माना जाता है. मंगल के प्रभाव के कारण इस राशि के लोग दूसरों को आदेश देना पसंद करते हैं. जब इस राशि की कुंडली में अशुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ती है तब क्रोध और अहंकार बढ़ जाता है. क्रोध में आकर कई बार इस राशि के जातक दूसरे का अहित कर बैठते हैं. हालांकि इसका पछतावा इन्हें बाद में होता है. ऐसे में वृश्चिक राशि के जातकों को क्रोध से बचना चाहिए.

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मकर (Capricorn)
मकर राशि के स्वामी शनि देव हैं. शनि को ग्रह माना जाता है. ऐसे में इस राशि की कुंडली में जब शनि कमजोर या अशुभ स्थिति में होते हैं तो व्यक्ति क्रोधी बन जाता है. साथ ही ऐसे लोगों को वाणी भी होता है. ऐसे में इस राशि के लोग क्रोध और वाणी दोष के कारण बड़ी समस्याओं का सामना करते हैं. इसके अलावा इन्हें दांपत्य जीवन में भी कलह और तनाव का सामना करना पड़ता है. क्रोध की वजह से इस राशि के लोग अपनी प्रतिभा का पूरा लाभ नहीं उठा पाते हैं. क्रोध से बचने के लिए शनिवार के दिन शनि मंदिर में दीपक जलाना चाहिए.