Amalaki Ekadashi 2022 : होली पूर्व है यह एकादशी व्रत नहीं जानते होंगे इसके 5 महत्व.

Amalaki Ekadashi 2022: फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में होली से पूर्व एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण एकादशी व्रत है. यह आमलकी एकादशी व्रत है, जो आंवला एकादशी (Amla Ekadashi) के नाम से भी जानी जाती है. इस साल होली (Holi) 18 मार्च को है और उससे चार दिन पूर्व 14 मार्च को आमलकी एकादशी है. आमलकी एकादशी पर पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का सुंदर संयोग बना हुआ है. सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए व्रत और कार्य पूर्णत: सफल सिद्ध होते हैं. इसे देखते हुए आप भी आमलकी एकादशी व्रत रख सकते हैं, जिससे आपको व्रत का पुण्य लाभ प्राप्त होगा. आमलकी एकादशी व्रत क्यों रखते हैं? आइए जानते हैं आमलकी एकादशी व्रत के महत्व (Importance Of Amalaki Ekadashi) के बारे में.

आमलकी एकादशी 2022
आमलकी एकादशी व्रत 14 मार्च दिन सोमवार को है. फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 13 मार्च दिन रविवार को सुबह 10:21 बजे शुरु हो रही है, जो 14 मार्च को दोपहर 12:05 बजे समाप्त हो जाएगी. व्रत का पारण अगले दिन 15 मार्च को सूर्योदय के बाद किया जाएगा.

आमलकी एकादशी व्रत का महत्व  :

1. आमलकी एकादशी व्रत विधिपूर्वक करने से व्यक्ति को स्वर्ग की प्राप्ति होती है. इस बारे में भगवान विष्णु ने ही बताया है.

2. जो लोग आमलकी एकादशी व्रत करते हैं, उनको मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्त होता है. श्रीहरि विष्णु की कृपा से पाप मिट जाते हैं.

3. आमलकी एकादशी व्रत में आंवले के पेड़ की पूजा करते हैं और आंवले का सेवन करते हैं. इस व्रत में आंवले का महत्व होता है, इसलिए इसे आंवला एकादशी भी कहते हैं.

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4. आंवले के पेड़ की उत्पत्ति भगवान विष्णु ने किया था. उन्होंने इसे दिव्य पेड़ की संज्ञा दी थी. आंवले के पेड़ में सभी देवताओं का वास होता है. आमलकी एकादशी को आंवले के पेड़ की पूजा करने की परंपरा है. ऐसा करने से सभी देवता प्रसन्न होते हैं.

5. आमलकी एकादशी के दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भगवान नारायण विष्णु की पूजा करने से 1000 गायों के दान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है.