Mouni Amavasya : भविष्य में होगी परेशानी मौनी अमावस्या पर भूलकर भी न करें ये काम.

Mouni Amavasya: माघ माह का सनातन धर्म में विशेष महत्व बताया गया है. माघ मास में कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मौनी अमावस्या (Mouni Amavasya) या माघी अमावस्या कहा जाता है. मौनी अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान, दान, जप और तप का अत्यंत महत्व बताया गया है. इस दिन मौन व्रत (Moun Vrat) रखने का विधान है, लेकिन गृहस्थ लोगों के लिए ऐसा कर पाना थोड़ा मुश्किल है. जिसके लिए बताया गया है कि पूजा-पाठ (Puja-Path) करने के बाद आप अपना मौन खोल सकते हैं. एक बात का विशेष ध्यान रखना होता है कि इस दिन आपके मुख से अपशब्द या कटु शब्द न निकलें. शास्त्रों में मौनी अमावस्या के दिए कुछ ऐसी बातें बताई गई हैं जिन्हें करने से आपको बचना चाहिए. आइए जानते हैं उन बातों को.

स्नान का महत्व
मौनी अमावस्या के दिन को बहुत महत्वपूर्ण और शुभ दिन माना जाता है. इस दिन की मान्यता है कि पवित्र नदियों में स्नान करने से आपको पुण्य की प्राप्ती होती है और आपके सारे पाप धुल जाते हैं. इस दिन मौन रहकर और मन में अच्छे विचार लाकर स्नान करना चाहिए.

बुरी आत्माएं रहती हैं प्रभावशाली
शास्त्रों के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन बुरी आत्माओं का प्रकोप रहता है. इस दिन बुरी आत्मा सबसे अधिक सक्रिए रहती हैं. जिससे व्यक्ति को नुकसान पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए कहा जाता है कि इस दिन सुनसान जगहों पर, कब्रिस्तान या श्मशान घाट के पास से गुजरने से बचना चाहिए.

पूजा से पहले ना खाएं
मान्यता के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन व्यक्ति को सुबह जल्दी उठना चाहिए. स्नान करने के बाद पूजा करें और उसके बाद ही भोजन या फलाहार ग्रहण करना चाहिए. पूजा करने से पहले मौन रहने का भी विधान इस दिन माना जाता है.

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गरुड़ पुराण के अनुसार
इस दिन को लेकर गरुड़ पुराण में उल्लेख मिलता है कि पति-पत्नी को मौनी अमावस्या के दिन संभोग करने से बचना चाहिए. इस दिन संबंध बनाने से जन्में बच्चे जीवनभर दुख भोगते हैं. इसलिए बेहतर होगा कि इस दिन पति-पत्नी दूर रहें.

लड़ाई-झगड़े से बचें
वैसे तो लड़ाई-झगड़े से हमेशा बचना चाहिए, लेकिन मौनी अमावस्या को लेकर शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन घर में या घर के आस-पास किसी भी तरह का क्लेश करने और लड़ाई-झगड़े से बचना चाहिए. साथ ही किसी व्यक्ति का अपमान भी नहीं करना चाहिए.

मांस-मदिरा से दूर रहें
मौनी अमावस्या पर मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए. माघ मास का हर दिन काफी पवित्र माना जाता है इसलिए इस माह सात्विक भोजन ही करना चाहिए. ऐसा करने से आपके ऊपर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और आपके जीवन में परेशानियां बढ़ जाती हैं.