Happiness and Prosperity : इन चीजों का दान भूलकर भी ना करें आ सकती है सुख समृद्धि में कमी.

हिंदू धर्म में दान की गिनती पुण्य कर्मों में की जाती है. कई ऐसे तीज-त्यौहार होते हैं, जिसमें दान का अत्यंत महत्व बताया गया है. दान के रूप में इंसान ज़रूरतमंदों को कई सारी चीज देते हैं. परंतु धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कई ऐसी चीजें हैं, जिन्हें भूलकर भी दान नहीं देना चाहिए. वह कौन सी वस्तुएं है, जिनको दान में नहीं देना चाहिए.

माता लक्ष्मी धन की देवी मानी जाती हैं. घर में मां लक्ष्मी का वास सुख समृद्धि लाता है. देवी लक्ष्मी से पूजा के बाद हम घर में ही वास करने का आग्रह करते हैं. यदि हम किसी को उपहार के तौर पर या दान के रूप में लक्ष्मी जी की प्रतिमा या चित्र देते हैं, तो इसका मतलब हम अपने घर से मां लक्ष्मी की विदाई कर रहे हैं. चांदी के ऐसे सिक्के जिन पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश बने हो देना शुभ नहीं होता.

पत्रों का दान कभी भी संपन्न व्यक्ति को नहीं करना चाहिए. क्योंकि संपन्न व्यक्ति आपके द्वारा दान में दिए गए पात्र का इस्तेमाल नहीं करते हैं. जिससे ये दान शून्य हो जाता है. अगर आपको पात्रों का दान करना है, तो जरूरतमंदों को ही करें जिससे वे आपको दुआ देंगे.

अगर आपको सुख समृद्धि चाहिए तो कभी भी धार्मिक पुस्तकों का दान ऐसे व्यक्ति को ना करें जिसे धर्म में कोई रुचि ना हो. ऐसा करने से आपका पुण्य फलित नहीं होता.

सनातन धर्म में भोजन का दान सर्वश्रेष्ठ माना गया है. किसी भूखे या जरूरतमंद को भोजन कराने से भगवान प्रसन्न होते हैं. हालांकि इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आप जूठे या बासी भोजन कभी भी दान में ना दें. ऐसा करने से भोजन पाने वाले का और मां अन्नपूर्णा का अपमान होता है.