Bhadrapada Amavasya 2022 : इन देवी-देवताओं को करें प्रसन्न पितरों संग दूर होगी हर बाधा.

हिंदू धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व है. पितरों के तर्पण से लेकर दान- पुण्य व तंत्र- मंत्र की सिद्धि तक के लिए ये दिन खास माना जाता है. यहां तक की सबसे बड़ा हिंदू पर्व दिवाली भी अमावस्या को ही आता है. हर महीने आने वाली अमावस्या का यूं तो अलग-अलग महत्व है, पर भाद्रपद की अमावस्या (Bhadrapada Amavasya) कई मायनों में अहम है, जिसमें पितरों के साथ भगवान श्रीकृष्ण, मां दुर्गा व शनि देव को भी प्रसन्न किया जा सकता है.

पिथौरा अमावस्या के नाम से जानी जाने वाली ये अमावस्या यदि सोमवार को आए तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है.

भगवान श्रीकृष्ण, शनि व मां दुर्गा की करें पूजा
27 अगस्त को भाद्रपद अमावस्या को भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय दिन माना जाता है. ऐसे में इस दिन उनकी पूजा विशेष फलदायी मानी गई है. जबकि आटे से मां दुर्गा सहित 64 देवियों की मूर्ति बनाकर उनका पूजन व उपवास महिलाओं के सौभाग्य के लिए श्रेष्ठ माना गया है.

पितरों का तर्पण करना श्रेष्ठ
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भाद्रपद की अमावस्या पर पितरों का तर्पण करना भी श्रेष्ठ होता है. कुशा घास से श्रद्धापूर्वक किए गए श्राद्ध व पिंडदान से पितृ देव प्रसन्न होकर पूरे परिवार को आशिर्वाद देते हैं.

कालसर्प से मुक्ति व कार्य सिद्धि
यदि किसी की कुंडली में कालसर्प योग की बाधा है तो भाद्रपद अमावस्या पर उसका भी निदान किया जा सकता है. इसके लिए तीर्थ स्नान में कालसर्प योग से मुक्ति का पूजन सरीखे विधान किए जा सकते हैं. अमावस्या के दिन गौशाला में गायों को हरी घास खिलाना भी कार्य में आ रही अड़चनों को दूर करने का उपाय माना जाता है.